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Credit Card use mein galti: लोग सबसे ज़्यादा कहाँ फँसते हैं?

Credit Card use mein galti: लोग सबसे ज़्यादा कहाँ फँसते हैं?

Credit Card use mein galti: लोग सबसे ज़्यादा कहाँ फँसते हैं?

आज credit card को लोग सुविधा नहीं, बल्कि lifestyle समझने लगे हैं। Mobile खरीदना हो, online shopping करनी हो या अचानक कोई खर्च आ जाए  credit card तुरंत काम आ जाता है। Cashback, reward points और नो cost EMI जैसी चीज़ें इतनी आकर्षक लगती हैं कि इंसान ये भूल ही जाता है कि वो असल में उधार का पैसा खर्च कर रहा है। यहीं से credit card use mein galti शुरू होती है। शुरुआत में सब आसान लगता है, लेकिन धीरे-धीरे वही card financial stress और कर्ज़ का कारण बन जाता है। इस ब्लॉग में हम समझेंगे कि credit card इस्तेमाल करते समय लोग सबसे ज़्यादा कहाँ फँसते हैं और कैसे वही छोटी-छोटी गलतियाँ बड़े नुकसान में बदल जाती हैं।

Credit card use mein galti की असली शुरुआत कहाँ से होती है

सबसे पहली समस्या mindset की होती है। लोग credit card को extra income समझ लेते हैं। उन्हें लगता है कि card limit बढ़ गई है, यानी spending power बढ़ गई है। जबकि सच्चाई ये है कि credit card आपकी income नहीं बढ़ाता, बल्कि future income को पहले ही खर्च करवा देता है। यही सोच आगे चलकर credit card ke nuksan की वजह बनती है। जब खर्च control में नहीं रहता और हर महीने bill बढ़ता चला जाता है, तब इंसान समझता है कि card ने उसे धीरे-धीरे फँसा लिया है।

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Cashback और reward points का लालच

Cashback और reward points credit card companies का सबसे बड़ा हथियार है। हर offer यही कहती है  इतना खर्च करो, इतना cashback पाओ। इंसान सोचता है कि वो फायदा कमा रहा है, जबकि असल में वो ज़रूरत से ज़्यादा खर्च कर रहा होता है। Cashback तभी मिलता है जब आप पैसा खर्च करते हैं। अगर आप cashback के लालच में non-essential चीज़ें खरीद रहे हैं, तो यही credit card use mein galti है। Cashback की खुशी कुछ दिनों की होती है, लेकिन bill की tension पूरे महीने चलती है।

Minimum due pay करना सबसे खतरनाक जाल

बहुत से लोग credit card bill में सिर्फ “minimum due” pay करके खुद को safe समझ लेते हैं। उन्हें लगता है कि उन्होंने bill भर दिया, अब कोई problem नहीं। लेकिन सच्चाई ये है कि minimum due pay करना credit card ke nuksan की सबसे बड़ी वजह है। बची हुई amount पर भारी interest लगती है, जो धीरे-धीरे debt को बढ़ा देती है। कई लोग सालों तक सिर्फ minimum due देते रहते हैं और समझ ही नहीं पाते कि उनका कर्ज़ खत्म क्यों नहीं हो रहा।

EMI में बदलना और EMI ka bojh

जब credit card bill ज़्यादा हो जाता है, तो लोग उसे EMI में convert कर लेते हैं। EMI देखकर उन्हें राहत मिलती है, क्योंकि monthly amount छोटी लगती है। लेकिन यही EMI आगे चलकर EMI ka bojh बन जाती है। एक EMI खत्म होने से पहले दूसरी शुरू हो जाती है। धीरे-धीरे income का बड़ा हिस्सा EMI में चला जाता है और saving शून्य हो जाती है। यही तरीका इंसान को लंबे समय तक debt trap में फँसाए रखता है।

Multiple credit cards रखना और control खो देना

आज बहुत से लोगों के पास एक से ज़्यादा credit cards होते हैं। अलग-अलग cards पर अलग-अलग offers मिलते हैं और इंसान track ही नहीं कर पाता कि किस card पर कितना खर्च हो रहा है Multiple cards का मतलब multiple bills और multiple due dates यहीं पर credit card use mein galti और भी बड़ी हो जाती है। Late payment, missed due date और penalty  ये सब मिलकर credit score खराब कर देते हैं।

Lifestyle upgrade के लिए credit card का इस्तेमाल

क्रेडिट कार्ड का सबसे ज़्यादा गलत इस्तेमाल lifestyle upgrade के लिए होता है। महंगा phone, branded clothes, luxury dining सब कुछ card से आसान लगता है। लेकिन लाइफ़ अपग्रेड income से होना चाहिए, loan से नहीं। Credit card से खरीदी गई चीज़ें कुछ समय बाद पुरानी हो जाती हैं, लेकिन उनका bill चलता रहता है। यही वजह है कि credit card ke nuksan धीरे-धीरे इंसान की financial growth को रोक देते हैं।

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Credit limit बढ़ते ही खर्च बढ़ जाना

Credit card companies समय-समय पर credit limit बढ़ा देती हैं। लोग इसे achievement समझ लेते हैं और खर्च भी बढ़ा देते हैं। लेकिन limit बढ़ना आपकी income बढ़ने का प्रमाण नहीं होता। Limit बढ़ते ही खर्च बढ़ाना एक बड़ी credit card use mein galti है। इसका नतीजा ये होता है कि अगले कुछ महीनों में bill संभालना मुश्किल हो जाता है।

Emergency fund की जगह credit card पर depend रहना

बहुत से लोग emergency fund नहीं बनाते और हर emergency में credit card इस्तेमाल करते हैं। Medical खर्च, travel या अचानक जरूरत — सब card से। लेकिन emergency के लिए credit card इस्तेमाल करना long-term में credit card ke nuksan बढ़ाता है। Emergency fund न होने की वजह से लोग interest और EMI के चक्र में फँस जाते हैं।

Late payment और credit score खराब होना

Late payment सिर्फ penalty नहीं लाता, बल्कि credit score भी खराब करता है। एक बार credit score गिर गया, तो future में loan महँगा मिलता है या मिलता ही नहीं। लोग इस बात को हल्के में लेते हैं, लेकिन यही छोटी-सी लापरवाही बड़ी financial problem बन जाती है।

तो क्या credit card पूरी तरह गलत है?

नहीं, credit card गलत नहीं है। गलत है उसका इस्तेमाल। Credit card एक powerful tool है, अगर discipline के साथ use किया जाए। Full payment करना, limit के अंदर खर्च करना और cashback को bonus समझना — यही सही तरीका है। Problem card में नहीं, behaviour में है।

Credit card se nuksan se kaise bacha ja sakta hai

सबसे पहले spending limit खुद तय करें, bank पर न छोड़ें। हर महीने पूरा bill pay करने की आदत डालें। Cashback और EMI के लालच में unnecessary खर्च न करें। Emergency fund बनाएं ताकि हर जरूरत में card का सहारा न लेना पड़े। Discipline ही credit card को दोस्त बनाता है, वरना वही दुश्मन बन जाता है।

अंतिम सच्चाई जो हर credit card user को समझनी चाहिए

Credit card पैसा नहीं देता, discipline मांगता है। जो इंसान discipline सीख लेता है, उसके लिए card एक सुविधा बन जाता है। लेकिन जो discipline नहीं रख पाता, उसके लिए वही card कर्ज़, stress और EMI ka bojh बन जाता है। अगर आप समय रहते समझ गए कि credit card use mein galti कहाँ हो रही है, तो आप खुद को बड़े financial नुकसान से बचा सकते हैं।

क्या आप credit card use करते हैं? आपको सबसे ज़्यादा परेशानी कहाँ आती है — bill, EMI या cashback trap?
नीचे comment में लिखिए, आपका अनुभव किसी और की बड़ी गलती बचा सकता है।

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