शेयर मार्केट क्या है: Share market क्या आपने भी अक्सर लोगों के मुँह से सुना है कि “फला आदमी ने शेयर मार्केट से एक ही दिन में लाखों कमा लिए”? या फिर सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो देखे होंगे जहाँ कोई कहता है — “सिर्फ एक क्लिक में अमीर बन जाइए”।
सच कहें तो ऐसे किस्से सुनकर ज्यादातर लोग या तो शेयर मार्केट को जादुई जगह समझ लेते हैं, या फिर डर जाते हैं कि यह तो बस जुआ है जहाँ लोग सब कुछ हार जाते हैं।
असलियत क्या है?
Share Market न तो जादू है और न ही अंधा जुआ। यह एक साइंटिफिक और लॉजिकल सिस्टम है जहाँ अगर आप सही जानकारी, धैर्य और रणनीति के साथ चलते हैं तो आप भी धीरे-धीरे अपना धन (Wealth) बढ़ा सकते हैं।
इस ब्लॉग में हम आपको सरल और आसान भाषा में समझाएँगे कि शेयर मार्केट क्या है और कैसे काम करता है, इसमें Investment और Trading का फर्क क्या है, शेयर खरीदने-बेचने की प्रक्रिया, Demat/Trading अकाउंट, चार्जेस, रिस्क और किसी अच्छी कंपनी को चुनने का तरीका।
शेयर मार्केट क्या है? — सरल भाषा में समझें
Share market वह जगह है जहाँ कंपनियों के हिस्से (शेयर) खरीदे और बेचे जाते हैं। जब आप किसी कंपनी का शेयर खरीदते हैं, तो आप उस कंपनी के छोटे हिस्सेदार बन जाते हैं — मतलब कंपनी के लाभ और नुकसान में आपकी भी हिस्सेदारी रहती है। शेयरों की कीमतें हर मिनट बदलती रहती हैं क्योंकि खरीदार और बेचने वालों की मांग-आपूर्ति बदलती है। यह प्राथमिक (IPO) और सेकेंडरी (बजर/एक्सचेंज पर ट्रेडिंग) — दोनों तरह से काम करता है।
क्या शेयर मार्केट जुआ है? (सच और गलतफहमियाँ)
Share market अपने आप में जुआ नहीं है। जुए का मतलब है बिना जानकारी और बिना प्लान के सिर्फ किस्मत पर दांव लगाना। अगर आप:
- कंपनी की जानकारी पढ़ते हैं,
- दीर्घकालिक लक्ष्य रखते हैं, और
- अपने रिस्क को मैनेज करते हैं —
तो यह जुआ नहीं बल्कि निवेश (Investment) है। वहीं जो लोग बिना रणनीति के सिर्फ “जल्दी पैसा” की उम्मीद में उतावले ट्रेड करते हैं, उन्हें नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। कई बड़े ब्रोकर्स और सीखने वाले प्लेटफॉर्म यही सलाह देते हैं — पहले सीखें, फिर निवेश करें।
Investment और Trading में फ़र्क (नए लोगों के लिए जरूरी)
- Investment (निवेश): अच्छे शेयरों को लंबे समय (1-10 साल) के लिए रखना। उदहारण: किसी मजबूत बैंक या बड़ी IT कंपनी के शेयर पकड़कर रखना।
- Trading (ट्रेडिंग): छोटा-समय (इंट्राडे, स्विंग) में कीमत उतार-चढ़ाव से फायदा उठाना — रिस्क ज्यादा और समय घटा होता है।
नए लोगों के लिए सलाह: शुरुआत निवेश (लॉन्ग-टर्म) से करें, तभी अनुभव मिलते-मिलते आप ट्रेडिंग समझ पाएंगे।
Demat और Trading Account — क्या, क्यों और कैसे?
Demat Account = डिजिटल लॉकर जहाँ आपके खरीदे हुए शेयर सुरक्षित रहते हैं।
Trading Account = वही अकाउंट जिससे आप एक्सचेंज पर ऑर्डर भेजते हैं (Buy/Sell)।
अकाउंट खोलने के लिए आपको एक भरोसेमंद ब्रोकर्स के पास जाना होगा (Zerodha, Groww, Angel One, Upstox आदि)। एक बार दोनों अकाउंट सेटअप हो जाएँ तो आप मोबाइल ऐप से सीधे शेयर खरीद-बेच कर सकते हैं। कई ब्रोकर्स ने पूरा ऑनलाइन KYC प्रोसेस दे रखा है जिससे काम आसान हो जाता है।
कौन-सी ऐप्स और ब्रोकर्स लोकप्रिय हैं? (न्यूबी के लिए)
नए लोगों के लिए यूजर-फ्रेंडली और कम फीस वाले प्लेटफॉर्म:
Upstox (ट्रेंडिंग में लोकप्रिय),
Groww (सिंपल UI, beginners friendly),
Angel One, Upstox, 5Paisa।
हर ऐप की फीस/ब्रोकरेज अलग होती है — शुरुआत में कम-फी वाले प्लेटफॉर्म पर जाएँ और पहले एक छोटा-सा अमाउंट लगाकर सीखें।
शेयर कैसे खरीदे और बेचें? — चरणबद्ध तरीका (प्रैक्टिकल)
पहले एक अच्छा ब्रोकर्स चुनें और Demat + Trading अकाउंट खोलें।
अपनी बैंक-डिटेल्स लिंक करें और अकाउंट फंड करें।
ऐप में कंपनी का नाम/शेयर कोड सर्च करें।
Buy पर क्लिक कर Quantity और Order-Type (Market/Limit) चुनें।
Order place होते ही शेयर आपके Demat में आ जाएगा (सेटलमेंट नियमों के अनुसार)।
बेचने में Sell पर क्लिक करके ऑर्डर दें — प्रोसीड्स बैंक में आएँगे।
Profit और Loss पर किन-किस तरह के चार्ज लगते हैं?
ट्रांज़ैक्शन पर अलग-अलग कटौतियाँ लगती हैं — ब्रोकरेज, एक्सेंज चार्जेस, SEBI फीस, GST, और स्टॉक्स पर लागू स्टैम्प ड्यूटी। यानी चाहे आप प्रॉफिट में हों या लॉस में — हर ट्रांज़ैक्शन पर फीस लगती है। इसलिए छोटे-छोटे बार-बार ट्रेड करने से फीस जमा हो सकती है — नया निवेशक इसे ध्यान में रखे।
Risk कैसे समझें और कम कैसे करें? (साफ सुझाव)
Diversification: अपने पैसे को अलग-अलग सेक्टर्स और कंपनियों में बाँटें।
Emergency Fund: शेयर बाजार से पहले 3–6 महीने का इमरजेंसी फंड रखें।
SIP/Mutual Funds: सीधे शेयर के बजाए शुरूआत में SIP से शामिल होना सुरक्षित विकल्प है।
Stop-loss: ट्रेडिंग करते समय नुकसान को रोकने के लिए stop-loss सेट करें।
शिक्षा: रोज़ 20–30 मिनट मार्केट न्यूज और कंपनी इवेंट्स पढ़ें।
किसी कंपनी का शेयर चुनने के आसान तरीके (नए लोगों के लिए चेकलिस्ट)
कंपनी का बिज़नेस क्या है — आप इसे समझते हैं?
कंपनी लगातार मुनाफा कमा रही है या नहीं (3–5 साल का रिव्यू)।
कर्ज (debt) कितना है — बहुत कर्ज वाली कंपनी रिस्की हो सकती है।
Promoter holding और institutional खरीद (बड़े निवेशक) — अच्छा संकेत हो सकता है।
मार्केट कैप (small/mid/large) — नए निवेशक बड़े-कॅप से शुरुआत करें।
इन सरल चेकलिस्ट से आप impulsive खरीद से बचेंगे और बेहतर निर्णय ले पाएँगे।
शेयर मार्केट का देश पर प्रभाव (संक्षेप में)
Share Market देश की अर्थव्यवस्था का संकेतक भी होता है — जब मार्केट मजबूत रहता है तो कंपनियाँ पूँजी जुटाकर विस्तार करती हैं, रोज़गार बढ़ते हैं और इकोनोमी को बढ़ावा मिलता है। वहीँ तीव्र गिरावट आर्थिक भरोसे को प्रभावित कर सकती है। इसलिए निवेश केवल व्यक्तिगत लाभ नहीं — देश की आर्थिक गतिविधि से भी जुड़ा है।
आख़िर में — नए निवेशकों के लिए 7 छोटे-मोटे नियम
पहले सीखो, फिर निवेश करो।
छोटे-से शुरू करो — धीरे-धीरे बढ़ाओ।
लॉन्ग-टर्म सोच रखें।
हर ट्रांज़ैक्शन पर लगने वाली फीस समझो।
Diversify करो — “सभी अंडे एक टोकरी में मत रखो।
अगर समय नहीं दे सकते — Mutual Funds या SIP से शुरुआत करें।
हेरफेर करने वाले सोशल मीडिया-टिप्स पर बिना रिसर्च के भरोसा न करें।
शेयर मार्केट का देश पर प्रभाव
शेयर मार्केट सिर्फ निवेशकों के लिए ही नहीं बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी अहम है।
कंपनियाँ IPO और Shares बेचकर पैसा जुटाती हैं।
इससे नए प्रोजेक्ट शुरू होते हैं और Jobs बढ़ते हैं।
जब मार्केट अच्छा चलता है तो देश की Economy मजबूत होती है।
नए निवेशकों के लिए गोल्डन टिप्स
पहले सीखो, फिर निवेश करो।
छोटा अमाउंट लगाकर शुरुआत करो।
लॉन्ग टर्म सोच रखो।
बार-बार ट्रेडिंग से बचो — फीस ज्यादा कटती है।
Diversify करो — एक ही स्टॉक पर भरोसा मत करो।
फेक टिप्स और सोशल मीडिया के झांसे में न आओ।











