जानिए सरल भाषा में शेयर मार्केट क्या है? और यह कैसे काम करता हैं?
शेयर मार्केट एक सामान्य बाज़ार की तरह ही होता है। जैसे आप किसी सामान्य बाज़ार में फल और सब्ज़ियां खरीदते हैं, वैसे ही शेयर मार्केट में आप कंपनियों के शेयर खरीदते और बेचते हैं। यह कुछ लोगों के लिए पैसे कमाने का एक आसान रास्ता हो सकता है, तो कुछ के लिए जीवन की सबसे बड़ी गलती भी। किसी ने इससे अपना जीवन बनाया है, तो किसी ने इसमें अपना सब कुछ गँवा दिया है।
हमें शेयर मार्केट की ज़रूरत क्यों है?
कल्पना कीजिए कि आप एक मिठाई की दुकान चलाते हैं और आप दूसरे शहर में भी एक नई ब्रांच खोलना चाहते हैं, लेकिन आपके पास पर्याप्त पैसे नहीं हैं। ऐसे में, आपको एक विचार आता है: आप अपने दोस्तों से पैसे लेते हैं और बदले में उन्हें हर साल मुनाफे का एक हिस्सा देने का वादा करते हैं। इस तरह, आपकी नई दुकान भी खुल जाती है और आपको कोई बड़ा लोन भी नहीं लेना पड़ता।
शेयर मार्केट भी इसी तरह काम करता है, जहाँ बड़ी-बड़ी कंपनियाँ अपनी वित्तीय ज़रूरतें पूरी करने के लिए आम लोगों के पास जाती हैं। इसके बदले में, वे लोगों को हर साल अपने मुनाफे का कुछ हिस्सा देने का वादा करती हैं, जिसे डिविडेंड (Dividend) कहा जाता है।
शेयर क्या होता है?
शेयर किसी कंपनी की ओनरशिप (स्वामित्व) की एक यूनिट होती है। उदाहरण के लिए, यदि आपकी एक कंपनी है जिसकी कुल कीमत ₹100 है और 10 लोगों ने उसमें मिलकर ₹10-₹10 निवेश किए हैं, तो इसका मतलब है कि हर व्यक्ति ने कंपनी में 10% पैसा लगाया है, या वह 10% का मालिक है, या हर व्यक्ति के पास कंपनी का ₹10 का एक शेयर मौजूद है।
शेयर की कीमत कैसे बढ़ती या घटती है?
शेयर की कीमत बढ़ने या घटने का कोई सीधा जवाब नहीं है, क्योंकि इसे कई कारक प्रभावित करते हैं। हालांकि, शेयर बाज़ार भी सामान्य बाज़ार की तरह ही मांग और आपूर्ति (Demand and Supply) के नियम का पालन करता है। इसका सीधा सा नियम है कि:
- जब किसी शेयर की मांग बढ़ती है, तो उसकी कीमत भी बढ़ती है।
- जब किसी शेयर की मांग कम होती है, तो शेयर की कीमत भी कम हो जाती है।
उदाहरण: मान लीजिए आपने एक शेयर ₹5 में खरीदा था और अब उसकी कीमत बढ़कर ₹10 हो गई है। आप उसे बेचना चाहते हैं और आपके पास तीन खरीदार हैं: एक ₹10, एक ₹8 और एक ₹12 देने को तैयार है। जाहिर है, आप उसे बेचेंगे जो आपको ₹12 देगा, और इस तरह शेयर की कीमत ₹10 से बढ़कर ₹12 हो जाएगी। इसके विपरीत, यदि आप उसे ₹10 में बेचना चाहते हैं, लेकिन मांग बहुत कम है और कोई केवल ₹7 देने को तैयार है, तो आपको मजबूरन ₹7 में बेचना पड़ सकता है, और कीमत ₹10 से घटकर ₹7 हो जाएगी।
शेयर की कीमत को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक:
शेयर की कीमत को प्रभावित करने वाले कारकों को चार मुख्य श्रेणियों में बाँटा जा सकता है:
- कंपनी से संबंधित कारक (Company Related Factors): कंपनी के बारे में कोई भी सकारात्मक या नकारात्मक खबर शेयर की कीमत को प्रभावित करती है।
- सकारात्मक: यदि कंपनी को कोई बड़ा ऑर्डर मिलता है, तो शेयर की कीमत बढ़ेगी।
- नकारात्मक: यदि कंपनी में कोई घोटाला होता है, तो शेयर की कीमत कम हो जाएगी।
- उद्योग से संबंधित कारक (Industry Related Factors): हर कंपनी किसी बड़े उद्योग का हिस्सा होती है, इसलिए उस उद्योग की खबरें भी कंपनी के शेयर की कीमत पर असर डालती हैं।
- उदाहरण: स्मार्टफोन के आने से कैमरा उद्योग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा, जिससे कैमरा बनाने वाली कंपनियों के शेयरों की कीमत काफी कम हो गई।
- बाज़ार का रुझान (Market Trend): यदि पूरा बाज़ार सकारात्मक दिशा में है, तो आमतौर पर सभी व्यक्तिगत शेयरों की कीमतें बढ़ती हुई दिखती हैं।
- आर्थिक कारक (Economic Factors): इसमें वे सभी कारक आते हैं जो पूरी अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हैं।
- उदाहरण: युद्ध, राजनीति, महंगाई, जीडीपी, मौद्रिक नीतियाँ।
- मूल नियम: यदि कोई भी घटना कंपनी के मुनाफे को बढ़ाएगी, तो शेयर की कीमत बढ़ेगी। यदि कोई घटना कंपनी को नुकसान पहुँचाएगी, तो शेयर की कीमत कम हो जाएगी। जैसे, कोविड-19 लॉकडाउन के कारण कंपनियों को नुकसान हुआ और 23 मार्च 2020 को भारत के शेयर बाज़ार (सेंसेक्स) में 13.2% की गिरावट आई थी।
शेयर बाज़ार के प्रकार:
अपनी समझ के लिए शेयर बाज़ार को दो प्रकारों में बाँटा जा सकता है:
- प्राइमरी मार्केट (Primary Market): वह बाज़ार जहाँ कोई कंपनी पहली बार अपने शेयर बेचती है। इसे आईपीओ (IPO – Initial Public Offering) कहा जाता है।
- सेकेंडरी मार्केट (Secondary Market): वह बाज़ार जहाँ कंपनी के पुराने शेयरों को खरीदा और बेचा जाता है।
- उदाहरण: Amazon से साइकिल खरीदना प्राइमरी मार्केट है, और फिर उसे OLX पर बेचना सेकेंडरी मार्केट है।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE), बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE), निफ्टी 50 (Nifty 50), और सेंसेक्स (Sensex) क्या हैं?

- NSE (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज) और BSE (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज): ये दोनों स्टॉक एक्सचेंज हैं, यानी वे जगहें जहाँ शेयर खरीदे या बेचे जाते हैं। जैसे एक ही तरह का सामान अलग-अलग बाज़ार में मिलता है, वैसे ही एक ही कंपनी का शेयर आपको अलग-अलग स्टॉक एक्सचेंज में मिल सकता है।
- निफ्टी 50 (Nifty 50): यह NSE पर सूचीबद्ध शीर्ष 50 कंपनियों का एक इंडेक्स या समूह है। क्योंकि ये शीर्ष कंपनियाँ हैं और इनका मूल्य सबसे ज़्यादा है, इस इंडेक्स में होने वाले उतार-चढ़ाव पूरे बाज़ार की दिशा तय करते हैं।
- सेंसेक्स (Sensex): यह BSE (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) की शीर्ष 30 कंपनियों का एक समूह है जो पूरे बाज़ार की स्थिति को दर्शाता है।
शेयर मार्केट की शुरुआत कैसे हुई?
दुनिया के पहले स्टॉक एक्सचेंज की शुरुआत 1602 में हुई थी। उसी साल डच ईस्ट इंडिया कंपनी का गठन हुआ था, जिसका काम दुनिया भर में व्यापार करना और डच साम्राज्य का विस्तार करना था। वैश्विक व्यापार के लिए बहुत सारे पैसों की ज़रूरत थी। तभी डच ईस्ट इंडिया कंपनी ने एक बहुत ही अभिनव विचार पेश किया: उन्होंने आम जनता से पैसे एकत्र किए और इस तरह दुनिया का पहला शेयर जारी हुआ। यह नवाचार ही आज के शेयर बाज़ार का आधार बना।
एक सादृश्य के तौर पर: शेयर बाज़ार को आप एक बड़े, गतिशील समूह नृत्य की तरह समझ सकते हैं। इसमें हर कंपनी एक नर्तक है, और उसके शेयर की कीमत उसके नृत्य की गति और लोकप्रियता दर्शाती है। जब नर्तक अच्छा प्रदर्शन करता है या उसके लिए दर्शक (मांग) बढ़ते हैं, तो उसकी लोकप्रियता (कीमत) बढ़ती है। यदि वह लड़खड़ाता है या दर्शक कम हो जाते हैं, तो उसकी लोकप्रियता घट जाती है। पूरा हॉल (बाज़ार) और संगीत (आर्थिक कारक) भी हर नर्तक के प्रदर्शन को प्रभावित करते हैं। कुछ नर्तक पहली बार स्टेज पर आते हैं (प्राइमरी मार्केट), जबकि अन्य पहले से ही नाच रहे होते हैं और अपनी जगह बदल रहे होते हैं (सेकेंडरी मार्केट)। यह एक जटिल लेकिन रोमांचक नृत्य है जहाँ हर कदम और हर बदलाव मायने रखता है।
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